पाकिस्तान को दर्द

विगत दिन काश्मीर के उरी में जो आतंक का नंगा नाच नाचा गया है और उसमें हमारे सुरक्षा कोर के जवान शहीद हुए हैं। उसका प्रभाव हमारे देश के रहनुमाओं से लेकर साधारण जन तक पड़ा है। चारों तरफ पाकिस्तान के खिलाफ आवाज उठायी जा रही है। ऐसे आसार दिख रहे हैं कि पाकिस्तान पर आक्रमण के लिए सरकार पर दबाव डाला जा रहा है। पाकिस्तान की तरफ से होने वाला यह अद्यतन हमला है। यह हमारे लिए चिन्तनीय है।
हमारे यहां जब भी हमला होता है तो यहां पर आतंकी के रूप मंे जो पहचाना जाता है वह जरूर पाकिस्तानी होता है। यह जरूर है कि उसे सरकारी मुलाजिम नहीं कहा जा सकतां । हृदय विदारक घटनाओं से भरपूर मुंबई की घटना में तो आतंकियों को फांसी की सजा भी दी जा चुकी है। काश्मीर के एक आतंकी को फांसी की सजा दी गयी थी जिसका नाम था अफजल गुरू। वह भारतीय नागरिक था जो आतंक को बढावा देना चाहता था। उसके बाद काश्मीर में आतंकियों के शव को सबके सामने रखकर यदि गिनती की जाय तो निंनानबे प्रतिशत पाकिस्तानी होंगे । अब हम आतंक की आमद को परिभाषित करते हुए पाक का नाम लेते हैं तो इसे तो अनुचित नहीं कहा जा सकता ।
पाक जनता व सरकार को इसका दर्द होता हैकि भारत अपने उपर होने व ाले हमले को हमारे उपर थोपता है और हमें बदनाम करने का प्रयास करता है। इस उरी की घटना के बाद पाक प्रधानमंत्री के बयान से इसकी साफ झलक मिलती है । पाक के नेताओं में वे जो भारत में आतंक फैलाने के मामले में बदनाम उन्हें पूरी छूट है कि वे जो चाहे बकवास करें और जनता के मन को इस प्रकार बरगलावे कि वह पागल होकर अनाप शनाप आचरण कर सामाजिक वातावरण को दूषित करे। इस हमले में जो संगठन आरोपित है उसका सरगना भारत में जेल काट चुका है और उसकी रिहाई के लिए वर्तमान काश्मीर मुख्यमंत्री सुश्री महबुबा का अपहरण एक स्मरणीय घटना है। अब हमारे पास क्या कारण है कि प ा क नागरिक के रूप में पहचाने जाने पर भी पाकिस्तान को नहीं कह कर दूसरे मुल्क के नाम को सामने लावे । पाकिस्तान सरकार की व्यवस्था का नमुना तो यही है कि वहां के नागरिक अपनी सुरक्षा कवच को भेद कर हमारी खामी को दर्शाते हुए भारत में घुसपैठ कर लेते हैं और मनचाही जगह मनचाही हरकत कर सामाजिक व्यवस्था को हानि पहुंचाते हैं जिससे जन-धन की हानि होती है।
पाकिस्तान की जनता को इसका पता होना चाहिए कि काश्मीर यदि विवादित मुद्दा ह ोता तो आज तक संयुक्त राष्ट्र संघ में इस पर बहस होती और यह निर्णय आता कि काश्मीरी जन अपने भविष्य का फैसला करें कि वे क्या चाहते हैं। पचास साल पीछे की बात को लेकर पाक सरकार जो प्रोपगण्डा फैलाती है वह काश्मीरी जन का भला नहीं कर सकती है। हमारे प्रधानमंत्री के बयान के बाद जो हलचल पाक अधिकृत काश्मीर में हुई इससे साफ हो गया कि पाक की काश्मीरी जनता पाक के व्यवहार से संतुष्ट नहीं है।
पाक सरकार का यह कहना सही है कि जब भी भारत पर आतंकी हमला होता है वह पाक का राग अलापता है लेकिन उसके रहनुमाओं को यह तो देखना चाहिए कि किसी भी घटना में जब कोई आतंकी पकड़ा या मारा जाता है तो वह पाक न ागरिक होता है और वह यह स्वीकार करता है कि उसे ट्रेनिंग, हथियार, पैसा व अन्य सहायताएं पाक से ही मिलती हैं। इस पर पाक सरकार कोई बयान नहीं देती कि उस आतंकी के घर व रहाइश का पता लगावे और उसके सहयोगियों पर कड़ाई बरते जिससे भारत पर इस तरह की आफत न बरपे। लेकिन भारत के खिलाफ काश्मीर राग तो पाक अलापता है वह यह कहते थोड़ा भी नहीं झिझकता कि भारत में काश्मीर नामका जो राज्य है वह विवादित है जब कि काश्मीर का विलय भी हो चुका है और भारत पाक की सीमा रेखा भी निश्चित कर दी गयी है। जिस पर भारत पाक सरकारों का आपस सहमति पूर्वक समझौता होता रहा है। जब कि हमारे पास इस तरह का आधार है तो फिर काश्मीर विवादित क्यों?महाराजा ने तो अपना पूरा राज्य ही विलय किया था तो पाक अधिकृत काश्मीर पर भी भारत का दावा बनता है लेकिन भारत की समझदारी व यथास्थिति बनाये रखने के इरादों को उसकी कमजोरी मानकर काश्मीर को विवादित कहना यह ऐसी नीति है जिससे भारत के प्रति विरोध प्रदर्शित होता है।
पाक सरकार को चाहिए कि वह भारत के प्रति अपना नजरिया बदले और हमारे द्वारा दिये जा रहे संबंधों को उपेक्षा की दृष्टि से देखना बंद करें हमारे मोदी साहब कई मौकों पर पाक जनता व रहनुमाओं के साथ सदव्यवहार कर चुके हैं। जब भी भारत में पाक के बारे में अच्छा माहौल पैदा करने की कोशिश की जाती है और लगने लगता है कि पाकिस्तान के साथ हमारे संबंधों की मधुरता बढेगी तभी कोई-न -कोई ऐसी घटना पाक के रास्ते हो जाती है कि सब किए कराये पर पानी फिर जाता है । पाक की जनता भी आतंक से पीड़ित है । वहां भी आए दिन आतंकी हमला होता है तो पाक के लिए यह समझना आसान है कि आतंक की मार कैसी है और उसका भुक्त भोगी कैसे जी ता हैं इसलिए जबकि हमारे संबंध मधुर होने के कगार पर आ रहे हो ऐसी घटना के लिए दोषियों को सजा दी जानी चाहिए चाहे व भारतीय हों या पाकी । परन्तुं इसके लिए काफी संयम ,दृढ निश्चिय व संकल्पशाली होने की आवश्यकता है । यदि ऐसा होता है तो दोनों देशों की जनता का भला होगा। नहीं तो युद्ध से किसी का भला आज तक न हुआ है और न होगा। भारत पाक द ोनों युद्ध का मजा झेल चुके हैं। इस लिए आरोपियों को सजा दिलाना ही मुख्य बात है। इसके लिए भारत पाक सरकार को मिलजुल कर काम करना चाहिए।

 

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